Monday, 23 November 2015

सूक्ति- योगेन्द्राश



जब मानव रंग

दिखाता हैं 

मुखौटा भी 

शरमाता हैं...

सब लज्जाएं 

झुकती हैं

जब मानव

धर्म भुलाता

हैं...।।


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