Thursday, 26 November 2015

सूक्ति- योगेन्द्राश


मैं निशब्द हूँ, स्तब्ध हूँ और

मैं मौन हूँ...।।

बिन तेरे इस दुनियाँ में

मैं सोचता हूँ,

कौन हूँ...।।

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