Monday, 16 November 2015

मेरी प्रणय यात्रा- योगेन्द्राश


पेड़ कि परछाई में,

धूप में तन्हाई में,

रात में अंगडाई में,

देखा था जो सपना...,

पूरा न हुआ...।।

चंदा का मिलन सूरज

से....

पूरा न हुआ...।।

धरती का मिलन अम्बर

से....

पूरा न हुआ वो आखरी 

पन्ना...

बस! वो आखरी पन्ना 

प्रेम का...।।

पूरा न हुआ हमसे...।।

4 comments:

  1. वाह भाई मजा आ गया ।
    intresting romantic journey..

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  2. अादरणीय दिग्विजय एवं ऋषभ जी आपका बहुत-बहुत आभार

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