मेरा साहित्य योगेन्द्राश, मेरे काव्य जीवन कि वो यात्रा हैं जिसने मुझे कब योगेन्द्र से योगेन्द्राश में बदल दिया मुझे पता ही नहीं चला। मित्रों ये सब पलक झपकते ही नहीं हुआ हैं इसमें काफी सारा वक्त खपाया गया हैं जिसके उपरान्त मुझें ये साहित्य के मोती प्राप्त हुए हैं । मित्रो, अंत में मैं आप प्रबुद्ध जनों से यही उम्मीद करता हूँ कि आप के द्वारा मेरी साहित्य साधना का स्वागत एवं समादर होगा । धन्यवाद ।
Tuesday, 24 November 2015
Monday, 23 November 2015
Monday, 16 November 2015
भारत- मेरी प्रथम कविता
हिन्द कि हवाओं में,
अपनो कि दुआओं में,
देख लेती हूँ मैं सपने,
पेड़ कि छाँव में..।।
कौन हैं प्रतापी जो मुझको
हराएगा,
कौन हैं भला जो मुझे राह
से हटाएगा,
ह्रदय में बहती हैं मेरे पावन
गंगा,
तेरा पाप भला मेरा क्या कर
पाएगा..।।
मैं तो हूँ अँगवाड़ी सारे विश्व
कि,
हूँ दुलारी मैं तो तीनो समुद्र
कि,
खिलते हैं जहाँ प्रतिभाओं के
फूल,
मैं हूँ वो भाग्यशाली फूलवाड़ी
विश्व कि..।।
कौन हैं यहाँ जो मेरे सच को
झुठलाएगा,
कौन हैं भला जो मेरे गाँधी को
भुलाएगा,
विश्व आस्था का प्रतीक हूँ
मैं,
मेरे इस प्रतीक को कौन मिटा
पाएगा..।।
ये माना कि हथियार उठाती नहीं
मैं,
अकारण ही हिंसा फैलाती नहीं
मैं,
मगर बुझदिल समझने कि भूल
न करना,
यूँ ही हिमालय का टीका लगाती
नहीं मैं..।।
Saturday, 14 November 2015
कविता का शीर्षक- खुद में भगवान नजर आ जाए ।
पतझड़ पावन बहार हैं
खुला आसमां प्रेम दिखाए,
मगर ये सब बेकार हैं ।
यूँ समेट ली हैं ये दुनिया
मानव ने चौखाटे में,
अलग-अलग छड़ रंग दिखाए
नए-नए भिन्न मुखौटे में ।
फुदक रही ये
जीवन-धारा
इस सीमित गलियारे
में,
मानो पंक्षी घर बनाए
समंदर के सिरहाने
में ।
न प्रताप न संयम तुझमें
न प्रेम कि ज्वाला हैं,
जहाँ भी नजर उठाकर देखो
वहाँ गड़बड़ घोटाला हैं ।
जीवन में न रंग बचा
है
मानो फीका ये संसार
हैं,
छोटा सा परिवार
बनाकर
सोंचे जिम्मेदार हैं
।
यूँ जो अगर जिम्मेदारी
कर्तव्य समझ में आ जाए,
सच मान लो इस दुनिया में
राम, रहीम फिर आ जाए ।
तो कर वादा हे! मानव
अपने इस परिवार से,
सीमित से गलियार नहीं
इस पूरे संसार से ।
करे भला तू जाति का अपनी
मानव तेरी जाति हैं,
मानव का धर्म वहीं जिस
धर्म में विश्व शांति हैं ।
आँखो को जो ये पूरा संसार
नजर में आ जाए,
सच मान लो दुनिया में
इंसान नजर में आ जाए ।
फैल जाएगी प्यार-मोहब्बत
इस पूरे संसार में,
जो गर मानव को खुद में
भगवान नजर में आ जाए ।।
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