मेरा साहित्य योगेन्द्राश, मेरे काव्य जीवन कि वो यात्रा हैं जिसने मुझे कब योगेन्द्र से योगेन्द्राश में बदल दिया मुझे पता ही नहीं चला। मित्रों ये सब पलक झपकते ही नहीं हुआ हैं इसमें काफी सारा वक्त खपाया गया हैं जिसके उपरान्त मुझें ये साहित्य के मोती प्राप्त हुए हैं । मित्रो, अंत में मैं आप प्रबुद्ध जनों से यही उम्मीद करता हूँ कि आप के द्वारा मेरी साहित्य साधना का स्वागत एवं समादर होगा । धन्यवाद ।
वाह भाई मजा आ गया ।
ReplyDeleteintresting romantic journey..
bhut badhiyaan bhai.
ReplyDeletebhut badhiyaan bhai.
ReplyDeleteअादरणीय दिग्विजय एवं ऋषभ जी आपका बहुत-बहुत आभार
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